देवगढ़। राजस्थान पुलिस द्वारा पूरे प्रदेश में चलाए जा रहे साइबर सुरक्षित राजस्थान जन-जागरूकता अभियान के तहत जिले में साइबर ठगी के खिलाफ अभियान चल रहा है। महानिदेशक पुलिस, साइबर क्राइम एवं तकनीकी सेवाएं राजस्थान के निर्देशानुसार सितंबर 2026 को साइबर अपराधों से बचाव हेतु जन-जागरूकता माह के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में जिला पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल के मार्गदर्शन में जमीनी पहल की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत सामाजिक कार्यकर्ता भावना पालीवाल और डिजिटल प्रहरियों ने डोर-टू-डोर जाकर महिलाओं और युवतियों को डिजिटल साक्षरता, सुरक्षित ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन, फर्जी लॉटरी और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर होने वाली ठगी के प्रति जागरूक किया।
आमतौर पर साइबर जागरूकता कार्यक्रम बड़े सभागारों, स्कूलों अथवा चौपालों तक सीमित रहते हैं, जहां घरेलू कामकाज में व्यस्त महिलाओं की भागीदारी कम होती है। साइबर अपराधियों द्वारा गृहिणियों को आसान शिकार बनाए जाने की घटनाओं को देखते हुए पालीवाल ने क्षेत्र के 50 से अधिक घरों में जाकर महिलाओं से आत्मीय संवाद कर डिजिटल सुरक्षा की जानकारी दी। जन-जागरूकता संपर्क के दौरान बताया कि आज राशन और सब्जी से लेकर घरेलू बिलों तक हर जगह यूपीआई और ऑनलाइन भुगतान का चलन बढ़ गया है, लेकिन थोड़ी सी असावधानी से खाता खाली हो सकता है। महिलाओं को फोन या मैसेज पर अक्सर लाखों रुपये की लॉटरी, कार या केबीसी इनाम का झांसा दिया जाता है और प्रोसेसिंग फीस या टैक्स के नाम पर उनसे पैसे ऐंठे जाते हैं। इसके साथ ही टेलीग्राम व सोशल मीडिया पर घर बैठे 2-3 घंटे काम कर 2000 से 5000 रुपये कमाएं, यूट्यूब वीडियो लाइक करें या होटल रिव्यू दें जैसे विज्ञापनों से सतर्क रहने की अपील की गई। बताया गया कि ठग पहले विश्वास जीतने के लिए छोटा मुनाफा देते हैं और बाद में टास्क पूरा करने के नाम पर लाखों रुपये हड़प लेते हैं।
अभियान के दौरान सभी महिलाओं को भारत सरकार और राजस्थान पुलिस के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 1930 और राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की जानकारी दी गई। बताया गया कि यदि धोखाधड़ी हो जाए तो बिना घबराए शुरुआती एक घंटे यानी गोल्डन ऑवर में 1930 पर कॉल करें ताकि राशि को फ्रीज कराया जा सके। महिलाओं ने स्वयं सतर्क रहकर दूसरों को जागरूक करने का संकल्प लिया।