पूर्ण हुई ‘चितराम सेवा’, नवनीत प्रियजी की भाजी सेवा और दर्शन व्यवस्थाओं का लिया जायजा

नाथद्वारा। पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधान पीठ श्रीनाथजी की हवेली में रूप चतुर्दशी का पर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर प्रभु श्रीनाथजी के विशेष स्नान और अद्भुत श्रृंगार के मनोरथ ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
परंपरा अनुसार, विजयादशमी के दिन स्थापित किए गए पूवों को सुखाकर उनकी अग्नि से आज प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व चौक पूरकर और दीपों से सुसज्जित कर प्रभु को तिलक-आरती के साथ स्नान कराया गया। प्रभु के रूप को निखारने के विशेष भाव से स्नान में कठुम्बा एवं ओंगा की दातन तथा विभिन्न वनौषधियाँ धराई गईं। राजभोग के समय प्रभु को गंगा-जमनी सोना-चाँदी की काँचवारी हटड़ी, सुनहरी जरी के घेरदार बागा, फुरकसाई जरी की पाग और मेघश्याम ठाड़े वस्त्रों से सजाया गया। जड़ाऊ पन्ना, हीरा, और मोती के आभूषणों के साथ जरमा सिलमा-सितारे की भरत वाली पिछवाई ने प्रभु की वनमाला के भारी श्रृंगार की शोभा को कई गुना बढ़ा दिया।


रूप चतुर्दशी के अवसर पर श्री नवनीत प्रियजी भी चोतरा पर हटड़ी में बिराजे, वहीं दिनभर भाजी की सेवा का क्रम चला। इस विशेष मनोरथ के लिए एक दिन पूर्व ही सायं काल नगर के आस-पास के विभिन्न गांवों से बैलगाड़ियों में भरकर ताजी भाजी श्रीजी मंदिर पहुँची थी।

एक माह से चल रही ‘चितराम सेवा’ हुई पूर्ण ।

नवरात्रि से श्रीजी की हवेली में चल रही चितराम (चित्रकारी) सेवा भी आज गोवर्धन पूजा चौक में हाथी-घोड़े के निर्माण के साथ संपन्न हो गई। गौड़ व जांगिड़ ब्राह्मणों द्वारा पिछले एक महीने में सूरजपोल, कमल चौक, बैठकजी, सिंहपोल और गोवर्धन पूजा चौक की दीवारों पर हाथी-घोड़े, सखियाँ, द्वारपाल, बारात और प्रभु की विभिन्न लीलाओं की मनमोहक चित्रकारी की गई।

उत्सव और दर्शन व्यवस्थाओं का अधिकारियों ने किया निरीक्षण।

आगामी उत्सवों और भीड़ को देखते हुए तिलकायत महाराजश्री की आज्ञा व युवाचार्य गोस्वामी श्री विशाल बावा के मार्गदर्शन में आज मंदिर के वरिष्ठ अधिकारियों ने श्रीनाथ गार्ड के साथ दर्शन व्यवस्थाओं का सघन जायजा लिया। तिलकायत के निजी सलाहकार अंजन शाह, तिलकायत सचिव लीलाधर पुरोहित, सहायक अधिकारी अनिल सनाढ्य, कमांडिंग और सेवा विभाग के कार्मिकों ने संपूर्ण परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान दर्शनार्थियों के सुगम प्रवेश व निकासी, गौमाता के पधारने के मार्ग, और ‘लूट दर्शन’ के दौरान की जाने वाली विशेष व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े ।