नाथद्वारा, राजस्थान। श्री रामनवमी के पावन अवसर पर गुरुवार, 26 मार्च 2026 को प्रातः 8:00 बजे, नाथद्वारा के पवित्र गिरिराज पर्वत पर 131 फीट ऊँची दिव्य “श्री श्रीजी के हनुमानजी” प्रतिमा का लोकार्पण एक भव्य एवं ऐतिहासिक समारोह में संपन्न होगा। 500 फीट ऊँचे दुर्गम पर्वत शिखर पर स्थापित यह प्रतिमा अपनी भव्यता, आध्यात्मिकता और अद्वितीय निर्माण के कारण विशेष महत्व रखती है।

यह अलौकिक परियोजना एस.एम.बी. कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के सीईओ श्री गिरीशभाई रतिलाल शाह की गहन श्रद्धा, अटूट विश्वास और समर्पण का जीवंत उदाहरण है। उनकी संकल्प शक्ति इस सत्य को पुनः स्थापित करती है कि दृढ़ भक्ति और गुरु कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है।

यह पावन कार्य परम पूज्य गोस्वामी तिलकायित श्री 108 श्री इंद्रदमनजी महाराजश्री की आज्ञा तथा गोस्वामी श्री 105 श्री विशाल बावासाहब के आशीर्वाद से पूर्ण हुआ है। प्रतिमा का लोकार्पण इन्हीं पूज्य संतों के पावन सान्निध्य में तथा श्रीमद् राजचंद्र मिशन धरमपुर के संस्थापक पूज्य गुरुदेवश्री राकेशजी के कर-कमलों द्वारा सम्पन्न किया जाएगा, जिनके आध्यात्मिक मार्गदर्शन ने इस सेवा को ऊर्जा प्रदान की।

‘विनम्र मुद्रा’ (हाथ जोड़े हुए) में विराजमान यह प्रतिमा भक्ति, समर्पण और सेवा भाव का अनुपम प्रतीक है। विशेष रूप से इसका मुख श्रीनाथजी मंदिर की ओर है, जो प्रभु के प्रति हनुमानजी की अनन्य निष्ठा और रक्षक स्वरूप को दर्शाता है।

इस दिव्य कृति का निर्माण विख्यात मूर्तिकार श्री नरेश कुमावत द्वारा किया गया है, जिन्होंने पूर्व में भी विश्वस्तरीय प्रतिमाओं का सृजन कर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। मात्र तीन वर्षों से कुछ अधिक समय में पूर्ण हुई यह प्रतिमा उत्कृष्ट शिल्प, तकनीकी दक्षता और सामूहिक प्रयास का सशक्त उदाहरण है।

मजबूत M30 ग्रेड आरसीसी आधार पर निर्मित इस संरचना में लगभग 115 टन स्टील और 40 टन फाइबरग्लास का उपयोग किया गया है। स्टील-कंक्रीट के आंतरिक ढांचे तथा यूवी-प्रतिरोधी फाइबरग्लास की बाहरी परत इसे दीर्घकालिक स्थायित्व एवं आकर्षक सौंदर्य प्रदान करती है।

यह भव्य प्रतिमा नाथद्वारा को वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान देने के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन को भी सशक्त बनाएगी। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भक्ति, साहस और निःस्वार्थ सेवा का प्रेरणास्रोत बनकर एक दिव्य प्रकाश स्तंभ के रूप में प्रतिष्ठित होगी।