नाथद्वारा। पुष्टिमार्गीय प्रधान पीठ प्रभु श्रीनाथजी की हवेली में अधिक मास के पावन अवसर पर शनिवार को अधिक ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी पर अलौकिक मनोरथ संपन्न हुए। पूज्यपाद तिलकायत महाराज श्री की आज्ञा एवं श्री विशाल बावा तथा श्री लाल बावा की गरिमामयी उपस्थिति में श्रीजी प्रभु राजभोग दर्शन में “सघन कुंज” मनोरथ एवं सायंकाल भोग आरती में “श्री वृंदावन सघन कुंज फुले” के मनोरथ में बिराजे। वहीं श्री लाडले लाल प्रभु “चलो सखी कुंज गोपाल जहां” मनोरथ में लालबाग पधारे।

शोभायात्रा से पधारे लालबाग
त्रयोदशी के अवसर पर श्री लाडले लाल प्रभु मोती महल से भव्य शोभायात्रा में लालबाग पहुंचे। श्रीनाथ बैंड की मधुर ध्वनि, गोपाल निशान, गोविंद पलटन, कीर्तन मंडली के साथ सुखपाल में बिराजकर प्रभु लालबाग पधारे। मार्ग में नगरवासियों व वैष्णवजनों ने पुष्प वर्षा व जयकारों से स्वागत किया। मंदिर में तिलकायत श्री, श्री विशाल बावा व श्री लाल बावा की उपस्थिति में पंड्या जी द्वारा स्वस्ति पुण्या वाचन कर प्रभु को लालबाग में पधराया गया। इस दौरान वल्लभ कुल की बहू जी श्रीमती राज राजेश्वरी, श्रीमती दीक्षिता, श्रीमती पद्मिनी बेटीजी, श्रीमती प्रियंवदा बेटीजी व आराधिका बेटीजी उपस्थित रहीं।

फव्वारों से बरसा सावन-भादो
लालबाग को भव्य सज्जा व रोशनी से सजाया गया। सावन-भादो कुंड के चारों ओर फव्वारों से रिमझिम बूंदों के बीच प्रभु को कलात्मक पुष्प हिंडोले में बिराजित किया गया। छतरी में यमुना पुलिन के भाव से ‘चलो सखी कुंज गोपाल जहां’ मनोरथ सिद्ध किया गया। सखियों के भाव में हजारों वैष्णवजन दर्शन के लिए उमड़े। तिलकायत महाराज श्री, श्री विशाल बावा व श्री लाल बावा ने प्रभु की आरती उतारी।

उष्णकाल का विशेष श्रृंगार
श्रीजी प्रभु को उष्णकाल के विशेष श्रृंगार में मल्ल कच्छ, बसरा मोती का टिपारा, भूल-भुलैया की पिछवाई व मोती की बनमाला धराई गई। श्रीकर्ण में कुंडल व कर-कमलों में वेणु-वेत्र सुशोभित किए गए। सन्मुख पट गोटी हकीक की सजाई गई। इन अलौकिक झांकियों के दर्शन कर देश-विदेश से आए हजारों वैष्णवजन धन्य हुए व हवेली श्रीजी बावा के जयकारों से गूंज उठी।