पुष्टिमार्ग में बाल स्वरूप श्रीजी के रक्षक हैं हनुमान – श्री विशाल बावा
नाथद्वारा। पुष्टिमार्गीय प्रधान पीठ प्रभु श्रीनाथ जी की हवेली के पीठाधीश्वर गोस्वामी तिलकायत श्री राकेश जी महाराज श्री की आज्ञा एवं गो.चि.105श्री विशाल जी (श्री भूपेश कुमार जी) बावा की प्रेरणा एवं मार्ग दर्शन में राम नवमी पर्व के शुभारंभ के
अवसर पर गुरुवार को नाथद्वारा स्थित श्री गिरिराज पर्वत पर “श्रीजी के हनुमान जी” के स्वरूप का श्री विशाल बावा के कर कमलों द्वारा भव्य लोकार्पण किया गया।

इस अवसर पर प्रातः8:00 बजे शास्त्रोक्त विधि से यज्ञ हवन की श्री विशाल बावा एवं श्रीमती दिक्षिता बहुजी द्वारा हवन की पूर्णाहुति एवं हनुमान जी के अष्टधातु से निर्मित छोटे स्वरूप का अभिषेक एवं पूजन किया गया एवं आरती उतार कर वेदोक्त अनुष्ठान पूर्ण किया गया। इस अवसर पर अतिथि के रूप में श्रीमद् रामचंद्र मिशन,धरमपुर के संस्थापक गुरुदेव श्री राकेश जी भी सादर उपस्थित थे।

लोकार्पण पश्चात श्री विशाल बावा ने श्री जी के हनुमान जी के निर्माण के मनोरथी गिरीश भाई शाह एवं उनके संपूर्ण परिवार व रामचंद्र मिशन के संस्थापक गुरुदेव राकेश जी,प्रतिमा के वास्तुकार नरेश कुमावत,शिरीष सनाढ्य का रजाई,ऊपरना ओढ़ा कर एवं प्रसाद प्रदान कर समाधान किया गया। रामचंद्र मिशन के श्री राकेश जी ने श्री विशाल बावा का माल्यार्पण एवं शोल ओढ़ाकर सम्मान किया।
इस अवसर पर श्री विशाल बावा ने अपने प्रवचन में पुष्टिमार्ग में श्रीजी प्रभु एवं रुद्र अवतार श्री हनुमान जी के संबंध का विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह समस्त जगत श्री कृष्णमय है,श्रीजी मय है। श्री गिरिराज जी का पुष्टि मार्ग में दो भाव है एक तो भक्त है श्री हरिदास के और दूसरा स्वरूप स्वयं श्रीजी परंतु श्री नाथद्वारा में तो श्रीजी तो साक्षात विराज रहे हैं तो हम यह भाव कह सकते हैं कि एक भक्त के पास स्वयं गिरिराज जी हैं और दूसरे भक्त श्री हनुमान जी विराज रहे हैं एवं श्री हनुमान जी तो स्वयं रुद्र के अवतार हैं और स्वयं शिव तो परम वैष्णव है, एक वैष्णव के पास दूसरे वैष्णव विराज सकते हैं और वानर यूथ मुख्य रूप श्री हनुमान जी वन में एवं श्री शिवजी को पर्वत आदि में विराजने में आनंद आता है जो प्रत्यक्ष रूप से श्रीजी के हनुमान जी सर्व जगत को पर्यावरण से भी जोड़ते हैं।

श्रीजी प्रभु में नवरात्रि के अवसर पर खरका के पद जो कि श्री राम एवं हनुमान की लीला के गाए जाते हैं यह भी एक प्रत्यक्ष उदाहरण है की पुष्टि मार्ग में पूर्ण पुरुषोत्तम श्री कृष्ण एवं मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम एकाकार है। इस अवसर पर मंदिर के पंड्या जी परेश नागर,मयूर उपाध्याय,देवकिशन जोशी ने अनुष्ठानिक क्रिया संपादित की।
इस अवसर पर प्रबुद्ध जनों में श्रीनाथजी मंदिर के अधिकारी सुधाकर उपाध्याय, तिलकायत श्री के मुख्य सलाहकार अंजन शाह, मंदिर मंडल के सीईओ जितेंद्र पांडे,श्रीनाथजी मंदिर के सहायक अधिकारी अनिल सनाढ्य, तिलकायत श्री के मुख्य सचिव लीलाधर पुरोहित, कैलाश पुरोहित,समाधानी उमंग मेहता,मंदिर के मीडिया प्रभारी एवं पीआरओ गिरीश व्यास,राजेश्वर त्रिपाठी,सोशल मीडिया प्रभारी महर्षि व्यास, जनम गांधी,भावेश पटेल,जमादार विट्ठल सनाढ्य, बृजवासी संघ के अध्यक्ष श्याम लाल गुर्जर,श्रीनाथ गाइड संघ के अध्यक्ष अर्जुन गुर्जर, प्रमोद सनाढ्य,कैलाश पालीवाल,कल्पित,देवेश सांचीहर,दिव्या सांचीहर आदि मंदिर सेवक एवं हजारों वैष्णव जन उपस्थित थे।