ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों तक पहुंचेगी वाटरशेड सुधारों की जानकारी, राजसमंद की 21 ग्राम पंचायतों में होगा व्यापक प्रसार
राजसमंद। भारत सरकार एवं राजस्थान सरकार के समन्वित प्रयासों से नागरिक केंद्रित वाटरशेड विकास सुधारों को ग्रामीण समुदाय तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के उद्देश्य से ‘रिफॉर्म उत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से वाटरशेड विकास से जुड़े सुधारों, योजनाओं एवं उनके लाभों की जानकारी ग्राम सभाओं के जरिए आमजन तक पहुंचाई जाएगी। प्रदेशभर की 9,593 ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं के माध्यम से इन सुधारों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
जल ग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के अनुसार रिफॉर्म उत्सव को जन योजना अभियान (PPC) एवं ‘सबकी योजना-सबका विकास’ की अवधारणा के साथ एकीकृत किया गया है। अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर, 2026 से ग्राम सभाओं के माध्यम से होगी। राजसमंद जिले में 3 वाटरशेड विकास परियोजनाओं के अंतर्गत लगभग 21 ग्राम पंचायतों में वाटरशेड विकास से संबंधित सुधारों एवं महत्वपूर्ण जानकारियों का प्रसार किया जाएगा।
वाटरशेड विकास का प्रमुख उद्देश्य मृदा एवं जल का संरक्षण कर जल संग्रहण क्षमता बढ़ाना, भूजल स्तर में सुधार लाना तथा कृषि उत्पादन एवं ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करना है। विभाग के अनुसार वर्षा आधारित क्षेत्रों में वाटरशेड गतिविधियों से सकारात्मक बदलाव सामने आए हैं। प्रदेश में गत 12 वर्षों में लगभग 3.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र को वाटरशेड विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत कवर किया गया है। पुराने वाटरशेड परियोजना क्षेत्रों में भूजल स्तर में 3 मीटर तक वृद्धि, खेती के क्षेत्र में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी तथा दूध उत्पादन में 40 प्रतिशत तक वृद्धि जैसे परिणाम सामने आए हैं। इन क्षेत्रों में किसानों की वार्षिक आय में 70 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रति हेक्टेयर राशि में वृद्धि से विकास कार्यों को मिलेगी मजबूती
वाटरशेड विकास परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए प्रति हेक्टेयर उपलब्ध राशि में भी वृद्धि की गई है। नॉन डी.डी.पी. क्षेत्रों में राशि 12,000 रुपए प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 22,000 रुपए तथा डी.डी.पी. क्षेत्रों में 15,000 रुपए प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 28,000 रुपए की गई है। इससे मृदा, जल स्रोतों एवं खेती के बेहतर विकास के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
परियोजना अवधि 7 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष
वाटरशेड विकास परियोजनाओं के लाभ ग्रामीणों तक शीघ्र पहुंचाने के उद्देश्य से परियोजना अवधि को 7 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष किया गया है। इससे स्वीकृत परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूर्ण करते हुए ग्रामीण समुदाय को अपेक्षाकृत शीघ्र लाभान्वित किया जा सकेगा।
वाटरशेड विकास को जन आंदोलन बनाने पर जोर
वाटरशेड विकास में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभाग द्वारा ‘वाटरशेड यात्रा’ एवं ‘वाटरशेड महोत्सव’ जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं। इन पहलों के माध्यम से जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण के साथ उनके दीर्घकालिक रखरखाव में समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया है। रिफॉर्म उत्सव के दौरान भी ग्राम सभाओं के माध्यम से जनभागीदारी को और सुदृढ़ करने पर विशेष जोर रहेगा।
रिफॉर्म को फाइल से फील्ड तक पहुंचाने का आह्वान
जिले के जल ग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग ने जिला एवं परियोजना स्तर पर योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने, फील्ड स्तर की मशीनरी को सक्रिय करने तथा रिफॉर्म उत्सव में अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। अभियान के माध्यम से वाटरशेड सुधारों को प्रत्येक गांव और ग्रामीण समुदाय तक पहुंचाकर विकसित भारत-2047 एवं सूखा-मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में प्रभावी योगदान देने का प्रयास किया जाएगा।