जयपुर / राजसमंद । महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM) और अश्लील सामग्री के ऑनलाइन प्रसार के खिलाफ राज्यव्यापी बड़ी कार्रवाई शुरू की है।
एडीजी साइबर क्राइम वी. के. सिंह के निर्देशन में यह अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस को नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन और विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से करीब 25 हजार विशिष्ट डेटा इनपुट्स और अलर्ट्स प्राप्त हुए थे। इनकी गहन तकनीकी जांच के बाद डिजिटल फुटप्रिंट्स पर कार्रवाई की गई।
15 हजार से अधिक सिम / नंबर और 7800 प्रोफाइल जांच के दायरे में
एडीजी वी. के. सिंह ने बताया कि तकनीकी पड़ताल के बाद राजस्थान पुलिस ने बड़े पैमाने पर ब्लॉकिंग और डिजिटल जब्ती की प्रक्रिया शुरू की है।
राज्य स्तरीय अभियान की प्रारंभिक कार्रवाई में 15,326 संदिग्ध मोबाइल नंबर / सिम की पहचान कर सेवा प्रदाताओं (TSPs) को भेजे गए हैं। लगभग 7,800 संदेहास्पद यूआरएल और प्रोफाइल ब्लॉक करवाए गए हैं। साथ ही 100 इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (स्मार्टफोन, हार्ड डिस्क आदि) को चिन्हित कर जांच के दायरे में लिया गया है।
जिला पुलिस के साथ समन्वय
साइबर क्राइम शाखा पूरे राज्य की जिला पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर कार्रवाई कर रही है। NCMEC से प्राप्त डेटा के आधार पर चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ सहित विभिन्न जिलों के थानों में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर सुरक्षा प्रणालियों के जरिए टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड, गूगल ड्राइव, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। बाल यौन शोषण सामग्री के निर्माण, भंडारण, प्रदर्शन, डाउनलोडिंग या किसी भी रूप में प्रसार में लिप्त पाए जाने पर पॉक्सो एक्ट, आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि बाल यौन शोषण या किसी भी आपत्तिजनक सामग्री को देखना, डाउनलोड करना या फॉरवर्ड करना कानूनन अपराध है। यदि ऐसा कोई लिंक या संदेश प्राप्त होता है तो उसे आगे प्रसारित न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल http://cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।