
नाथद्वारा। पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। 4 सितंबर को सुबह करीब 4:45 बजे पंचामृत स्नान एवं मंगला आरती के दर्शन हुए, जिसमें कृष्ण स्वरूप श्रीनाथजी को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंचामृत से स्नान करवाया गया तथा तिलक लगाकर आरती उतारी गई। वहीं रात्रि में जागरण के दर्शन अर्धरात्रि तक चलेंगे।
पर्व का सबसे विशेष आकर्षण रात्रि 12 बजे दी जाने वाली 21 तोपों की सलामी है। मान्यता है कि नंदराय के घर लालन के जन्म की खुशी में यह सलामी दी जाती है, ताकि गांव के मुखिया नंदराय के गांव व आसपास के क्षेत्रों में लोगों तक यह सूचना पहुंच जाए कि उनके तारणहार का जन्म हो चुका है और वे इसकी खुशियां मनाना शुरू करें। श्रीनाथजी के करीब 350 वर्ष पूर्व मेवाड़ पधारने के समय से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। नाथद्वारा को बृज का ही एक स्वरूप मानते हुए यहां भी आसपास के गांवों के लोग रात्रि 12 बजे तोपों की आवाज सुनकर श्रीकृष्ण जन्म की खुशियां मनाते हैं। ठीक 12 बजे मंदिर की छतरी से बिगुल बजाकर कृष्ण जन्म की सूचना दी जाती है और बिगुल बजने के साथ ही तोपों की सलामी शुरू हो जाती है।














कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रभु की सेवा क्रम में गोस्वामी तिलकायत श्री इन्द्रदमन महाराजश्री एवं युवराज गोस्वामी विशाल बावा ने मंगला दर्शन में प्रातः श्रीजी प्रभु को दूध, दही, घी, शक्कर व शहद से भव्य पंचामृत स्नान कराया तथा प्रभु की आरती उतारी। जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीजी प्रभु का विशेष श्रृंगार धराया गया, जिसमें प्रभु को दुहरा श्रृंगार, चाकदार केसरी वस्त्र तथा श्री मस्तक पर मोर चंद्रिका का अद्भुत श्रृंगार धराया गया। श्रृंगार दर्शन में मंदिर के पंड्याजी परेश नागर द्वारा श्रीजी प्रभु के सम्मुख प्रभु की जन्म पत्रिका का वाचन किया गया, जिसके पश्चात दोपहर में प्रभु को राजभोग आरोगाया । इस अवसर पर श्रीनाथ बैंड व श्रीनाथ गार्ड गोवर्धन पूजा चौक में पहुंचकर श्रीजी प्रभु की सेवा में सलामी दी तथा श्रीनाथ बैंड ने मधुर स्वर लहरियां बिखेरी।
नंद महोत्सव पर खेली जाएगी दूध-दही की होली –
5 सितंबर को सुबह 7:30 से 11:00 बजे तक नंद उत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान प्रभु श्रीनाथजी और लालन को सोने के पालने में झुलाया जाएगा तथा झूलते हुए लालन के दर्शन कराए जाएंगे। जन्मोत्सव की खुशी में ग्वाल-बाल दूध-दही से होली खेलकर उल्लास मनाएंगे और मंदिर में दर्शन करने आने वाले सभी श्रद्धालुओं के साथ हल्दी-केसर युक्त दूध-दही से होली खेलेंगे, जिसके लिए अभी से विशेष तैयारियां की जा चुकी हैं।
दर्शन व्यवस्था में हुआ बदलाव, दो दिन पास सुविधा रहेंगी बंद
श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ नियंत्रण के मद्देनजर मंदिर मंडल ने विशेष दर्शन एवं यातायात व्यवस्था लागू की है। मंदिर मंडल की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 5 सितंबर को नंदोत्सव के अवसर पर दर्शन समय में बदलाव किया गया है।
केसरयुक्त दही एवं छाछ छिड़काव दर्शन सुबह 7:30 से 11:00 बजे तक होंगे।
राजभोग की झांकी दर्शन दोपहर 2:15 बजे से करीब एक घंटे तक होंगे। इसी क्रम में उत्थापन के दर्शन रात 7:00 बजे से करीब आधे घंटे तक व भोग-आरती के दर्शन रात 9:00 बजे से करीब एक घंटे तक होंगे।
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सेवा-पूजा परंपरा एवं विधि-विधान के अनुसार होने के कारण दर्शन समय में परिवर्तन संभव है।
प्रशासनिक समिति के निर्देशानुसार 5 सितंबर तक सभी मनोरथियों के लिए दर्शन पास जारी नहीं किए जाएंगे। इनमें दिनभर के मनोरथ, राजभोग, मंगल-भोग, शयन-भोग, सामग्री/जिन्स भेंट अथवा अन्य किसी मनोरथ से संबंधित दर्शन पास शामिल हैं। इस अवधि में किसी भी प्रकार के प्रोटोकॉल दर्शन पास भी जारी नहीं होंगे तथा पास क्यूआर कोड मशीन भी बंद रहेगी। सभी प्रकार के दर्शन पास नियमानुसार उस दिन के अगले दिन सभी दर्शनों में जारी किए जाएंगे। मंदिर मंडल की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
नंदोत्सव पर प्रस्तावित दर्शन मार्ग के अनुसार महिलाओं का प्रवेश चौपाटी मंदिर मार्ग होते हुए श्रीनाथजी मंदिर के प्रतापमाली गेट से होगा, जबकि पुरुषों का प्रवेश चौपाटी मंदिर मार्ग होते हुए नक्कारखाना गेट से होगा। सभी श्रद्धालुओं की निकासी मोतीमहल से की जाएगी। देश विदेश से आये दर्शनार्थियों का हुजूम इस आलौकिक आनंद लेने नाथद्वारा में उमड़ा हुआ है।